Guar Mandi Bhav Today: राजस्थान और हरियाणा की पहचान मानी जाने वाली ग्वार फसल ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरनी शुरू कर दी हैं। कई सालों तक शांत पड़े बाजार में अब जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। करीब 16 साल बाद ग्वार के दामों में ऐसी मजबूती आई है जिसने किसानों और व्यापारियों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंडियों में आवक सीमित है, लेकिन खरीदारी का रुख मजबूत बना हुआ है।
वायदा बाजार से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, जिससे भावों को सहारा मिल रहा है। किसानों के मन में उम्मीद जगी है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी। वर्तमान हालात बताते हैं कि बाजार में नई ऊर्जा आई है और ग्वार फिर से कमाई वाली फसल के रूप में उभर सकता है।
आज का ताजा ग्वार मंडी भाव क्या चल रहा है?
देश की प्रमुख कृषि मंडियों में आज ग्वार के भाव मजबूत स्तर पर बने हुए हैं। अलग-अलग मंडियों में क्वालिटी और नमी के आधार पर रेट में थोड़ा फर्क जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का रुख सकारात्मक है। नीचे कुछ प्रमुख मंडियों के अनुमानित भाव दिए जा रहे हैं:
| मंडी/क्षेत्र | न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) | अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) | औसत भाव (₹/क्विंटल) |
|---|---|---|---|
| श्रीगंगानगर | 5,420 | 5,610 | 5,520 |
| हनुमानगढ़ | 5,380 | 5,560 | 5,470 |
| बीकानेर | 5,100 | 5,340 | 5,230 |
| नोहर | 5,250 | 5,440 | 5,360 |
| राजस्थान औसत | 4,800 | 5,350 | 5,150 |
| हरियाणा औसत | 6,750 | 7,120 | 6,980 |
वहीं वायदा बाजार में ग्वार सीड के दाम लगभग ₹5,300 से ₹5,600 प्रति क्विंटल के बीच बने हुए हैं और ग्वार गम ₹10,500 के आसपास कारोबार कर रहा है।
ग्वार में 16 साल बाद तेजी क्यों लौटी?
अगर 2010 से 2012 के दौर को याद करें तो उस समय ग्वार ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाए थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ग्वार गम की मांग तेजी से बढ़ी थी, जिससे कीमतें आसमान छूने लगी थीं। अब फिर से कुछ वैसा ही माहौल बनता दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस उद्योग में ग्वार गम का उपयोग बढ़ा है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग और फार्मा इंडस्ट्री में भी इसकी मांग मजबूत हुई है। निर्यात ऑर्डर में सुधार की खबरों ने घरेलू बाजार को सहारा दिया है। यही वजह है कि डेढ़ दशक बाद ग्वार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है।
मौजूदा तेजी के पीछे मुख्य कारण
ग्वार के भावों में आई मजबूती के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण निर्यात मांग में सुधार है, जिससे घरेलू कीमतों को समर्थन मिला है।
दूसरा कारण सीमित आवक है। कुछ क्षेत्रों में इस साल उत्पादन उम्मीद से कम रहा, जिससे बाजार में स्टॉक घटा हुआ है।
तीसरा कारण व्यापारियों की सक्रिय खरीद है। भविष्य में और तेजी की संभावना को देखते हुए बड़े कारोबारी स्टॉक जमा कर रहे हैं।
चौथा कारण बाजार की सकारात्मक धारणा है। जब बाजार में तेजी की चर्चा होती है तो खरीदारी बढ़ती है और भाव ऊपर जाते हैं।
क्या ग्वार फिर पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकता है?
कई किसान यह जानना चाहते हैं कि क्या ग्वार फिर से ₹20,000 या उससे अधिक का स्तर देख सकता है। फिलहाल मौजूदा हालात को देखते हुए इतनी बड़ी छलांग तुरंत संभव नहीं दिखती। हालांकि यदि वैश्विक मांग में बड़ा उछाल आता है और सप्लाई सीमित रहती है तो लंबी अवधि में ऊंचे स्तर देखने को मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्वार का बाजार स्वभाव से उतार-चढ़ाव वाला रहा है, इसलिए निर्णय लेते समय सावधानी जरूरी है।
किसानों के लिए सही रणनीति क्या हो सकती है?
मौजूदा समय में जिन किसानों के पास अच्छी क्वालिटी का ग्वार स्टॉक में है, वे एक साथ पूरा माल बेचने के बजाय चरणबद्ध बिक्री पर विचार कर सकते हैं। इससे औसत रेट बेहतर मिलने की संभावना रहती है।
साथ ही मंडी रुझान, वायदा बाजार की चाल और निर्यात से जुड़ी खबरों पर नजर रखना भी जरूरी है। बाजार में तेजी बनी रहती है तो आने वाले हफ्तों में और सुधार संभव है, लेकिन अचानक आवक बढ़ने पर दबाव भी बन सकता है।
आने वाले दिनों में ग्वार बाजार का संभावित रुख
ग्वार का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा, जैसे निर्यात ऑर्डर, घरेलू स्टॉक की स्थिति, नई फसल का अनुमान और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी ट्रेंड। फिलहाल इतना साफ है कि लंबे समय बाद ग्वार ने बाजार में नई ऊर्जा भर दी है।
यदि यही रफ्तार जारी रहती है तो ग्वार फिर से किसानों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। लेकिन समझदारी और बाजार की सही जानकारी के साथ निर्णय लेना ही बेहतर रहेगा।